इवेंट के बारे में

प्रवासी छत्तीसगढ़िया सम्मलेन 2026 एक प्रमुख वैश्विक मंच है, जो छत्तीसगढ़िया प्रवासी समुदायनिवेशकों, नीति निर्माताओं, उद्यमियों तथा सांस्कृतिक प्रतिनिधियोंको एक साथ लाता है, ताकि वे अपनी मातृभूमि से सम्बन्धों को सुदृढ़ कर सकें और सहयोग, निवेश तथा सतत विकास के नए अवसरों का सृजन कर सकें। यह सम्मेलन छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा नॉर्थ अमेरिका छत्तीसगढ़ एसोसिएशन / एनआरआई एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ (नाचा) के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

यह सम्मेलन विदेशों में रहने वाले भारतीयों, उद्योग से जुड़े लोगों, नए विचारों पर काम करने वालों, सरकारी प्रतिनिधियों और समाज के लोगों को एक साथ लाने के लिए आयोजित किया जा रहा है, ताकि वे मिलकर बात कर सकें, साथ काम करने के रास्ते खोज सकें और अपने अनुभव बाँट सकें। दो दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में चर्चा सत्र, आपसी मेलमिलाप और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इन सबके जरिए प्रतिभागियों को उद्योग, बुनियादी ढांचा, नए प्रयोग, संस्कृति, पर्यटन और सामाजिक विकास के क्षेत्रों में आगे बढ़ने के मौके समझने और देखने का अवसर मिलेगा।

प्रवासी छत्तीसगढ़िया सम्मलेन 2026 सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि हम सबका मिलकर लिया गया एक संकल्प है। इसका उद्देश्य ऐसा छत्तीसगढ़ बनाना है जो दुनिया से जुड़ा हो, आर्थिक रूप से मजबूत हो और अपनी संस्कृति पर गर्व करता हो।

छत्तीसगढ़

भारत के बीचों-बीच स्थित छत्तीसगढ़ एक तेजी से आगे बढ़ता हुआ राज्य है। यह अपने प्राकृतिक संसाधनों, समृद्ध संस्कृति और मजबूत उद्योगों के लिए जाना जाता है। मध्य भारत में होने के कारण यह सड़क, रेल और हवाई मार्ग से देश के कई बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है।

 

राजधानी रायपुर राज्य का प्रशासनिक और आर्थिक केंद्र है। यहाँ से राज्य के विकास की दिशा तय होती है। पाँच संभागों और 33 जिलों वाला छत्तीसगढ़ बेहतर प्रशासन और सबको साथ लेकर चलने वाले विकास के लिए जाना जाता है। अपनी परंपराओं को संजोए रखते हुए यह राज्य नए विचारों और नए कामों के साथ लगातार आगे बढ़ रहा है।

नवा रायपुर

नवा रायपुर, जिसे आधिकारिक रूप से अटल नगर कहा जाता है, एक आधुनिक और सुनियोजित स्मार्ट सिटी है। यहाँ आधुनिक सुविधाओं के साथ पर्यावरण का भी ध्यान रखा गया है। चौड़ी सड़कें, भूमिगत सुविधाएँ, स्मार्ट प्रशासन और बड़े-बड़े हरित क्षेत्र इसकी खास पहचान हैं। यहाँ कई सरकारी कार्यालय, शैक्षणिक संस्थान और नए व्यापारिक केंद्र स्थित हैं, जिससे यह निवेश और नए कामों के लिए आकर्षक स्थान बन गया है।

 

नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (NRDA) शहर के विकास का जिम्मा संभालता है। एक नियंत्रण केंद्र शहर के काम पर नजर रखता है और सेवाओं को ठीक से चलाने में मदद करता है। यह ऐसा शहर है जहाँ कचरे के प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाता है और लगभग 30 प्रतिशत क्षेत्र हरियाली के लिए रखा गया है। यहाँ शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम स्थित है, जिसकी बैठने की क्षमता 65,000 है और यह भारत के बड़े स्टेडियमों में से एक है। स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डे से देश के प्रमुख शहरों के लिए रोज़ सीधी उड़ानें उपलब्ध हैं।

 

बेहतर सुविधाओं, डिजिटल जुड़ाव और अच्छी जीवन गुणवत्ता पर ध्यान देते हुए नवा रायपुर छत्तीसगढ़ के आधुनिक और आगे बढ़ते शहरी भविष्य की झलक दिखाता है।

इतिहास

छत्तीसगढ़ का इतिहास चौथी शताब्दी ईस्वी तक जाता है। उस समय इसे दक्षिण कोसल कहा जाता था और इसकी राजधानी श्रीपुर थी, जिसे आज सिरपुर कहते हैं। “छत्तीसगढ़” नाम का मतलब है “छत्तीस किले”। माना जाता है कि यह नाम उन किलों से जुड़ा है, जिन पर रतनपुर से हैहय शासक राज करते थे।

 

मध्यकाल में छत्तीसगढ़ कई छोटे-छोटे राज्यों में बँटा हुआ था। इनमें कलचुरी वंश सबसे प्रमुख था, जिसने 9वीं से 18वीं शताब्दी तक रतनपुर से शासन किया। सरगुजा, रायगढ़ और बस्तर भी उस समय के महत्वपूर्ण राज्य थे। करीब 700 साल तक हैहयवंशी शासकों ने मध्य छत्तीसगढ़ पर राज किया, बाद में मराठों ने यहाँ हमला कर दिया।

 

18वीं शताब्दी में मराठों ने रतनपुर राज्य पर कब्जा कर लिया। इसके बाद छत्तीसगढ़ अंग्रेजों के शासन में आ गया। अंग्रेजों ने इसे सेंट्रल प्रोविंसेज़ में शामिल किया और रायपुर को मुख्य केंद्र बनाया।

 

1947 में भारत की आज़ादी के समय छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश का हिस्सा था। धीरे-धीरे अलग राज्य की मांग बढ़ती गई। अंत में 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ अलग राज्य बन गया।

उद्योग

छत्तीसगढ़ अपने खनिज संसाधनों, बेहतर सुविधाओं और उद्योगों के लिए जाना जाता है। इस्पात, बिजली, खनन और सीमेंट के क्षेत्र में इसकी खास पहचान है।

 

भारत के कुल लौह अयस्क का लगभग पाँचवां हिस्सा छत्तीसगढ़ में मिलता है। दक्षिण छत्तीसगढ़ की बैलाडीला पहाड़ियाँ अच्छे लौह अयस्क के लिए जानी जाती हैं। कोयला, लौह अयस्क और चूना पत्थर पास-पास होने से यहाँ इस्पात बनाना आसान और कम खर्च वाला है।

 

यह राज्य कई तरह के खनिजों से समृद्ध है। यहाँ हीरा, कोयला, चूना पत्थर, डोलोमाइट, टिन अयस्क, बॉक्साइट और सोना मिलता है। भारत का पूरा टिन अयस्क भंडार छत्तीसगढ़ में ही है। कुल मिलाकर यहाँ 28 प्रकार के खनिज पाए जाते हैं, जिससे उद्योगों के लिए अच्छे मौके बनते हैं।

 

छत्तीसगढ़ उन राज्यों में है जहाँ बिजली उत्पादन जरूरत से ज्यादा है। यहाँ कोयला भरपूर मात्रा में है, जिससे बिजली उत्पादन को बढ़ावा मिला है और उद्योगों को फायदा होता है।

 

देश के कुल सीमेंट उत्पादन का लगभग आधा हिस्सा छत्तीसगढ़ में बनता है। बड़े उद्योगों के साथ-साथ छोटे और मध्यम उद्योग, स्टार्टअप और कृषि से जुड़े उद्योग भी तेजी से बढ़े हैं। इससे राज्य का संतुलित विकास हुआ है। 

पिछले कुछ वर्षों में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी राज्य ने प्रगति की है। छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी (CHiPS) ई-गवर्नेंस और आईटी परियोजनाओं, जैसे CHOICE और SWAN, को लागू करने में अहम भूमिका निभा रही है। इससे लोगों को सेवाएँ आसानी से मिल रही हैं और डिजिटल सुविधाएँ मजबूत हुई हैं। मजबूत संसाधन, कुशल लोग और बेहतर सुविधाओं के साथ छत्तीसगढ़ उद्योग और विकास के लिए एक अच्छा और भरोसेमंद स्थान बनकर उभर रहा है।

कला और शिल्प

छत्तीसगढ़ अपनी पारंपरिक कला, धातु शिल्प, लोक संगीत और लोक नृत्यों के लिए जाना जाता है। ये कलाएँ बहुत पुरानी हैं और यहाँ की संस्कृति को दिखाती हैं। ये सिर्फ मनोरंजन नहीं हैं, बल्कि लोगों की आस्था, कहानियों और त्योहारों से जुड़ी हुई हैं।

 

बस्तर की ढोकरा धातु कला यहाँ की खास पहचान है। इसे एक पुरानी तकनीक से बनाया जाता है। आदिवासी कारीगर लकड़ी की नक्काशी, मिट्टी के बर्तन, बांस की चीजें, हाथ से बुने कपड़े और दीवारों पर रंगीन चित्र भी बनाते हैं।

 

गोंड कला भी छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण कला है। इसे गोंड जनजाति ने आगे बढ़ाया है। इसमें चमकीले रंग और खास तरह के डिजाइन होते हैं। इन चित्रों में प्रकृति, जानवर, कहानियाँ और रोज़मर्रा का जीवन दिखाया जाता है। आज गोंड कला को देश और विदेश में पहचान मिली है।

 

बस्तर का बाइसन हॉर्न नृत्य बहुत प्रसिद्ध है। इसमें कलाकार सिर पर सींग जैसे मुकुट पहनते हैं और रंगीन कपड़े पहनकर ढोल की धुन पर नाचते हैं। यह नृत्य शक्ति और प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक है।

 

पंथी नृत्य, राउत नाचा, सुवा नाचा और करमा नृत्य भी यहाँ के प्रमुख लोक नृत्य हैं। ये अलग-अलग समुदायों द्वारा त्योहारों और खास मौकों पर किए जाते हैं।

पंडवानी छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध लोकगाथा है, जिसमें महाभारत की कहानियाँ सुनाई जाती हैं। इसमें गीत और अभिनय का मेल होता है। तीजन बाई ने इस कला को देश-विदेश में पहचान दिलाई।   इन सब कला रूपों के कारण छत्तीसगढ़ अपनी लोक और आदिवासी संस्कृति के लिए जाना जाता है।

पर्यटन

छत्तीसगढ़ पर्यटन के लिए एक खास जगह है। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण लोगों को आकर्षित करता है।

 

बस्तर क्षेत्र अपनी आदिवासी संस्कृति, त्योहारों और हस्तशिल्प के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ चित्रकोट जलप्रपात और तीरथगढ़ जलप्रपात जैसे सुंदर स्थल हैं।

 

छत्तीसगढ़ में बड़े वन क्षेत्र हैं। यहाँ कई राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व हैं। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान और कुटुमसर गुफाएँ देखने लायक हैं। इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान बाघों के लिए जाना जाता है। अचानकमार-अमरकंटक जैवमंडल क्षेत्र को यूनेस्को की मान्यता मिली है। यहाँ प्रकृति घूमने, ट्रैकिंग करने और वन्यजीव देखने के अच्छे मौके मिलते हैं।

 

छत्तीसगढ़ धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के लिए भी जाना जाता है। सिरपुर के प्राचीन मंदिर, भोरमदेव मंदिर और बस्तर का दंतेश्वरी मंदिर प्रमुख स्थान हैं।

 

राज्य में ग्रामीण पर्यटन भी बढ़ रहा है। यहाँ आने वाले लोग गाँवों की जीवन शैली, परंपराएँ और स्थानीय संस्कृति को करीब से देख सकते हैं।